विस्तृत उत्तर
आवाहन षोडशोपचार पूजा का प्रथम और सर्वाधिक महत्वपूर्ण उपचार है। आवाहन का अर्थ है — देवता को सादर आमंत्रित करना और मूर्ति या चित्र में उनकी उपस्थिति का आग्रह करना।
सामान्य आवाहन मंत्र इस प्रकार है —
ॐ आगच्छ आगच्छ देवेश त्रैलोक्यतिमिरापहः।
क्रियमाणां मया पूजां गृहाण सुरसत्तम।
आवाहयामि स्थापयामि पूजयामि।।'
अर्थ — हे देवाधिदेव, हे त्रैलोक्य के अंधकार को हटाने वाले! आइए, आइए। मेरे द्वारा की जाने वाली इस पूजा को ग्रहण करें। मैं आपका आवाहन करता हूँ, स्थापना करता हूँ और पूजन करता हूँ।
आवाहन करते समय हाथ में चंदन, अक्षत और पुष्प लें। देवता का ध्यान करते हुए मंत्र बोलें और अंत में 'नमः' बोलकर अक्षत मूर्ति के चरणों में अर्पित करें।
विशेष देवता के लिए आवाहन मंत्र में उनका नाम बदल दिया जाता है — जैसे गणेश जी के लिए 'ॐ गणेशाय नमः, आवाहयामि', शिव जी के लिए 'ॐ शिवाय नमः, आवाहयामि'।
शास्त्रों के अनुसार आवाहन भाव-प्रधान क्रिया है — देवता के प्रति पूर्ण शरणागति और विनम्रता के साथ आवाहन करने पर देवता अवश्य पधारते हैं।





