विस्तृत उत्तर
सत्यनारायण पूजा एक 'काम्य कर्म' (इच्छा पूर्ति हेतु) है, जिसका प्रारंभ यजमान की मानसिक दृढ़ता हेतु 'संकल्प' से होता है। हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर यह शास्त्रोक्त मंत्र बोलना चाहिए:
अद्य पूर्वोच्चारित एवं गुण विशेषण विशिष्टायां शुभ पुण्यतिथौ... मम सर्व पाप क्षय पूर्वकं... श्री सत्यनारायण देवता प्रीत्यर्थं पूजनं करिष्ये।
(भावार्थ: आज इस शुभ तिथि पर, मेरे समस्त पापों के नाश और भगवान सत्यनारायण की प्रसन्नता हेतु, मैं यह पूजन करता हूँ।) जल को भूमि पर छोड़ दें।





