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काम्य कर्म से जुड़े सभी प्रश्न(3)

काम्य कर्म पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 3 प्रश्न उपलब्ध हैं।

स्मृति शास्त्र

याज्ञवल्क्य स्मृति 1.264 में क्या कहा गया है?

याज्ञवल्क्य स्मृति 1.264 का श्लोक है कन्यां कन्यावेदिनश्च पशून् वै सुसतानपि। द्यूतं कृषिं च वाणिज्यं द्विशफं चैकशफं तथा। यह श्लोक प्रतिपदा से अष्टमी तक की तिथियों के काम्य फल बताता है। द्वितीया का विशेष फल कन्यावेदिन यानी सुयोग्य दामाद और पशू वै यानी प्रचुर पशु-धन है। यह श्लोक नृसिंह प्रसाद-श्राद्धसारः ग्रन्थ में विस्तार से व्याख्यायित है।

#याज्ञवल्क्य 1.264#द्वितीया श्लोक#तिथि फल
श्राद्ध दर्शन

काम्य कर्म क्या होता है?

काम्य कर्म वह कर्म है जो किसी विशेष इच्छा या कामना की पूर्ति के लिए किया जाता है। काम का अर्थ है कामना, और काम्य का अर्थ है कामना से सम्बन्धित। श्राद्ध भी एक काम्य कर्म है, क्योंकि याज्ञवल्क्य स्मृति में हर तिथि का अपना विशिष्ट काम्य फल बताया गया है। द्वितीया का काम्य फल कन्यावेदिन यानी सुयोग्य दामाद और पशु-धन की प्राप्ति है।

#काम्य कर्म#इच्छा पूर्ति#द्वितीया फल
पूजा विधि

सत्यनारायण पूजा का संकल्प कैसे लें? (मंत्र सहित)

हाथ में जल, चावल और फूल लेकर भगवान का ध्यान करें और मंत्र बोलें: "मम सर्व पाप क्षय पूर्वकं... श्री सत्यनारायण देवता प्रीत्यर्थं पूजनं करिष्ये।" फिर जल ज़मीन पर छोड़ दें।

#संकल्प मंत्र#पूजा विधि#काम्य कर्म
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