विस्तृत उत्तर
आरती ज्योति पर हाथ रखकर सिर पर फेरना = दैवीय ऊर्जा ग्रहण।
कारण
- 1ऊर्जा अवशोषण: आरती ज्योति = दैवीय ऊर्जा + मंत्र ऊर्जा। हाथ गर्म → सिर (सहस्रार चक्र) पर = ऊर्जा मस्तिष्क तक।
- 2आशीर्वाद ग्रहण: ज्योति = ईश्वर प्रकाश। हाथ फेरना = आशीर्वाद स्वीकारना।
- 3तीसरा नेत्र: माथे (आज्ञा चक्र) पर = अंतर्ज्ञान जागरण।
- 4आँखें: ज्योति ऊर्जा → आँखों को स्पर्श = नेत्र ज्योति (मान्यता)।
सही विधि: आरती ज्योति पर दोनों हथेलियाँ → आँखों पर → माथे पर → सिर पर। श्रद्धापूर्वक।





