आरती के बाद हाथ सिर पर क्यों फेरते हैं?
की चेकलिस्ट
ज्योति=दैवीय ऊर्जा। हाथ गर्म→सिर(सहस्रार)=ऊर्जा मस्तिष्क। माथा(आज्ञा चक्र)=अंतर्ज्ञान। आँखें=नेत्र ज्योति। विधि: हथेली→आँख→माथा→सिर।
- 1ऊर्जा अवशोषण: आरती ज्योति = दैवीय ऊर्जा + मंत्र ऊर्जा। हाथ गर्म → सिर (सहस्रार चक्र) पर = ऊर्जा मस्तिष्क तक।
- 2आशीर्वाद ग्रहण: ज्योति = ईश्वर प्रकाश। हाथ फेरना = आशीर्वाद स्वीकारना।
- 3तीसरा नेत्र: माथे (आज्ञा चक्र) पर = अंतर्ज्ञान जागरण।
- 4आँखें: ज्योति ऊर्जा → आँखों को स्पर्श = नेत्र ज्योति (मान्यता)।
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