विस्तृत उत्तर
यह व्रत सूर्योदय से सूर्यास्त तक चलता है। काले या गहरे नीले वस्त्र पहनें। सुबह स्नान कर शनि मंदिर जाकर तेल अर्पित करें। घर या काली मंदिर में गणेश जी का पूजन करें। देवी के समक्ष 'सरसों के तेल का दीपक' (Mustard Oil Lamp) जलाना अनिवार्य है; इसमें थोड़े काले तिल और एक लौंग भी डाल सकते हैं। लाल पुष्प अर्पित करें। तांत्रिक विधि (भूतशुद्धि, न्यास) दीक्षित साधकों के लिए है, गृहस्थों को सात्विक विधि से धूप-दीप दिखाकर आद्या स्तोत्र या चालीसा का पाठ करना चाहिए।
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