विस्तृत उत्तर
पूजा में बैठने से पहले आसन-शुद्धि करना अनिवार्य माना गया है। इसका उद्देश्य है — जिस स्थान पर बैठकर पूजा करनी है, उसे देवता के योग्य शुद्ध और पवित्र बनाना।
आसन-शुद्धि की सामान्य विधि यह है — आसन (ऊनी, कुश या सूती आसन) पर बैठने से पहले उसे दाएं हाथ से स्पर्श करते हुए यह मंत्र बोलें —
ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता। त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु चासनम्।।
इसका भाव है — हे पृथ्वी देवि, जिस प्रकार तुम संसार को धारण करती हो और विष्णु द्वारा धारण की जाती हो, उसी प्रकार मुझे भी धारण करो और इस आसन को पवित्र करो।
इसके अतिरिक्त आसन पर बैठकर पवित्रीकरण के लिए 'ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्वावस्थां गतोऽपि वा। यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः।।' यह मंत्र पढ़ते हुए अपने ऊपर और पूजा-सामग्री पर जल छिड़कें।
कुश के आसन को विशेष शुद्ध माना जाता है क्योंकि कुश में देवत्व है। ऊनी आसन भी उत्तम माना जाता है। सीधे जमीन पर बैठकर पूजा नहीं करनी चाहिए।





