विस्तृत उत्तर
मौली (कलावा अथवा रक्षासूत्र) बांधने का मंत्र है —
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।'
इस मंत्र का अर्थ है — जिस रक्षासूत्र से दानवों के महाबली और दानवीर राजा बलि धर्म के बंधन में बांधे गए थे, उसी रक्षासूत्र से मैं तुम्हें बांधता हूँ। हे रक्षे! (रक्षासूत्र) तुम स्थिर रहो, स्थिर रहो — चलायमान मत होओ।
इस मंत्र का आध्यात्मिक भाव यह है कि जिस प्रकार भगवान वामन ने राजा बलि को रक्षासूत्र बांधकर धर्म के प्रति प्रतिबद्ध किया था, उसी प्रकार यह धागा बाँधने वाले को धर्म-पथ पर स्थिर रखता है।
मौली बांधने के नियम — पुरुषों और अविवाहित कन्याओं के दाएं हाथ में मौली बांधी जाती है। विवाहित स्त्रियों के बाएं हाथ में। मौली बांधते समय मुट्ठी बंद रखें और दूसरा हाथ सिर पर रखें। मौली का संकल्प, रक्षा और विश्वास — तीनों का प्रतीक माना जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार मौली बांधने से त्रिदेव — ब्रह्मा, विष्णु, महेश — और त्रिदेवियाँ — लक्ष्मी, पार्वती, सरस्वती — की कृपा प्राप्त होती है।





