विस्तृत उत्तर
शकुन शास्त्र और परंपरागत मान्यताओं के अनुसार पूजा करते समय छींक का आना अशुभ संकेत माना जाता है। इसे इस बात का सूचक माना जाता है कि किसी कार्य में बाधा आ सकती है या पूजा के समय मन पूरी तरह एकाग्र नहीं था।
हालाँकि यह ध्यान रखना आवश्यक है कि छींक एक शारीरिक क्रिया है। एलर्जी, धूल, धूप या मौसम के कारण छींक आ सकती है — इसका कोई नकारात्मक संकेत नहीं होता। शास्त्र मूल रूप से अचानक आई और अनपेक्षित छींक को ही संकेत मानते हैं।
यदि पूजा के दौरान छींक आ जाए तो घबराएं नहीं। छींकने के बाद थोड़ा रुकें, मन को शांत करें और भगवान से प्रार्थना करें। कुछ परंपराओं में कहा जाता है कि छींकने के बाद 'श्रीराम जय राम' या 'जय श्री कृष्ण' बोलने से छींक का अशुभ प्रभाव नष्ट हो जाता है। इसके बाद हाथ-मुँह धोकर पुनः पूजा प्रारंभ करें।
एक बार की छींक को अधिक महत्व न दें। भगवान भाव देखते हैं। यदि श्रद्धा सच्ची है और मन निर्मल है, तो एक छींक पूजा को निरर्थक नहीं बनाती। हाँ, अत्यंत महत्वपूर्ण अनुष्ठान या संकल्प के समय यदि बार-बार छींक आए, तो उसे संकेत मानकर पुनर्संकल्प लेकर पूजा पूर्ण करें।





