विस्तृत उत्तर
हिंदू धर्म में पूजा की शुद्धता का विशेष महत्व है। शास्त्रों में पूजा से पहले स्नान, शौच और शुद्धता सुनिश्चित करने का निर्देश है, ताकि पूजा के दौरान इस स्थिति का सामना न करना पड़े।
यदि पूजा के बीच में शौचालय जाने की अत्यंत आवश्यकता पड़ जाए तो निम्न विधि अपनाएं — सबसे पहले भगवान के सामने हाथ जोड़कर विनम्रतापूर्वक क्षमायाचना करें और पूजा को वहीं रोकें। शौचालय जाएं। वापस आकर पुनः पूर्ण स्नान यदि संभव हो तो करें, अन्यथा कम से कम हाथ-पैर और मुँह अच्छी तरह धोएं और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पुनः पूजाघर में प्रवेश करें, भगवान से क्षमा माँगें और जहाँ पूजा छोड़ी थी वहाँ से पुनः प्रारंभ करें।
यह ध्यान रखें कि शौचालय जाने के बाद बिना हाथ धोए पूजाघर में प्रवेश करना और पूजा करना शास्त्रसम्मत नहीं है। शुद्धता पूजा का मूल आधार है।
इस स्थिति से बचने का सबसे अच्छा उपाय यह है कि पूजा प्रारंभ करने से पहले ही शौच आदि से निवृत्त हो जाएं। छोटी पूजा हो तो एकाग्र होकर पूर्ण करें। लंबे अनुष्ठान में बीच-बीच में थोड़े अंतराल रखना भी उचित माना गया है।





