ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
शिव पूजा📜 धर्मशास्त्र, पूजा विधि परंपरा2 मिनट पठन

शिव पूजा में प्रसाद स्वयं बनाना चाहिए या बाजार से ला सकते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

स्वयं बनाना सर्वोत्तम — शुद्धता, भक्ति भाव, शिव स्मरण सहित। बाजार से भी ला सकते हैं — शर्त: ताजा, शुद्ध, अशुद्ध न हो। अर्पण पूर्व जल छिड़ककर शुद्ध करें। बासी/जूठा सर्वथा वर्जित। फल, दूध, मिठाई बाजार से चलते हैं। अनुष्ठान में स्वयं बनाना अनिवार्य। मुख्य: शिव भाव देखते हैं।

📖

विस्तृत उत्तर

शिव पूजा में प्रसाद (नैवेद्य) के विषय में शास्त्रों का मुख्य सिद्धांत 'शुद्धता' है:

स्वयं बनाना सर्वोत्तम

  1. 1स्वयं शुद्ध हाथों से, शुद्ध सामग्री से बनाया प्रसाद सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
  2. 2भक्ति भाव से बनाया प्रसाद में अधिक आध्यात्मिक ऊर्जा होती है।
  3. 3बनाते समय मन में शिव का स्मरण और 'ॐ नमः शिवाय' जप करना चाहिए।
  4. 4प्रसाद बनाने वाले व्यक्ति का स्नान किया हुआ और शुद्ध होना आवश्यक है।

बाजार से लाना

  1. 1यदि स्वयं बनाना संभव न हो तो बाजार से शुद्ध और ताजा प्रसाद लाया जा सकता है।
  2. 2बाजार का प्रसाद मंदिर से विशेष रूप से बनने वाला हो तो उत्तम।
  3. 3बाजार से लाने पर भी उसे शिवलिंग को अर्पित करने से पूर्व शुद्ध जल छिड़ककर शुद्ध करें।

सामान्य नियम

  • प्रसाद ताजा और शुद्ध होना चाहिए — बासी, जूठा या अशुद्ध प्रसाद सर्वथा वर्जित।
  • प्रसाद बनाते/लाते समय स्वच्छता का पूर्ण ध्यान रखें।
  • फल, दूध, मिठाई, सूखे मेवे — ये बाजार से लाकर भी अर्पित किए जा सकते हैं।
  • मुख्य बात भक्ति भाव है — शिव पुराण में कहा गया है कि शिव भाव देखते हैं, पदार्थ नहीं।

विशेष: अनुष्ठान और विशेष पूजा में स्वयं बनाया प्रसाद ही अर्पित करना चाहिए।

📜
शास्त्रीय स्रोत
धर्मशास्त्र, पूजा विधि परंपरा
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

प्रसादनैवेद्यशुद्धतापूजा नियम

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

शिव पूजा में प्रसाद स्वयं बनाना चाहिए या बाजार से ला सकते हैं — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको शिव पूजा से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर धर्मशास्त्र, पूजा विधि परंपरा पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।