विस्तृत उत्तर
शिव पूजा में प्रसाद (नैवेद्य) के विषय में शास्त्रों का मुख्य सिद्धांत 'शुद्धता' है:
स्वयं बनाना सर्वोत्तम
- 1स्वयं शुद्ध हाथों से, शुद्ध सामग्री से बनाया प्रसाद सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
- 2भक्ति भाव से बनाया प्रसाद में अधिक आध्यात्मिक ऊर्जा होती है।
- 3बनाते समय मन में शिव का स्मरण और 'ॐ नमः शिवाय' जप करना चाहिए।
- 4प्रसाद बनाने वाले व्यक्ति का स्नान किया हुआ और शुद्ध होना आवश्यक है।
बाजार से लाना
- 1यदि स्वयं बनाना संभव न हो तो बाजार से शुद्ध और ताजा प्रसाद लाया जा सकता है।
- 2बाजार का प्रसाद मंदिर से विशेष रूप से बनने वाला हो तो उत्तम।
- 3बाजार से लाने पर भी उसे शिवलिंग को अर्पित करने से पूर्व शुद्ध जल छिड़ककर शुद्ध करें।
सामान्य नियम
- ▸प्रसाद ताजा और शुद्ध होना चाहिए — बासी, जूठा या अशुद्ध प्रसाद सर्वथा वर्जित।
- ▸प्रसाद बनाते/लाते समय स्वच्छता का पूर्ण ध्यान रखें।
- ▸फल, दूध, मिठाई, सूखे मेवे — ये बाजार से लाकर भी अर्पित किए जा सकते हैं।
- ▸मुख्य बात भक्ति भाव है — शिव पुराण में कहा गया है कि शिव भाव देखते हैं, पदार्थ नहीं।
विशेष: अनुष्ठान और विशेष पूजा में स्वयं बनाया प्रसाद ही अर्पित करना चाहिए।





