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पूजा एवं अनुष्ठान⏱ 2 मिनट पठन

आचमन कैसे करें कितनी बार जल पिएं?

आचमन पूजा से पहले की एक अनिवार्य शुद्धि-क्रिया है।

संक्षिप्त उत्तर

तांबे के पात्र से तुलसी-युक्त जल लेकर तीन बार आचमन करें — पहले 'ॐ केशवाय नमः', दूसरे 'ॐ नारायणाय नमः', तीसरे 'ॐ माधवाय नमः' बोलते हुए। हथेली गाय के कान जैसी बनाएं, जल कंठ तक जाए।

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विस्तृत उत्तर

आचमन पूजा से पहले की एक अनिवार्य शुद्धि-क्रिया है। इसका अर्थ है — मंत्रपूर्वक जल पीकर अपने मन, वाणी और शरीर को पवित्र करना। शास्त्रों में कहा गया है कि बिना आचमन के पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता।

आचमन की विधि इस प्रकार है — तांबे के पात्र में गंगाजल या शुद्ध जल रखें, उसमें तुलसी के पत्ते डालें। दाएं हाथ की हथेली को गाय के कान जैसी आकृति में बनाएं — कनिष्ठा (सबसे छोटी) और अंगूठे को बाहर रखें, शेष तीनों उंगलियाँ मिलाकर हथेली में जल लें। आचमन में उतना ही जल लेना चाहिए जो कंठ तक पहुँचे।

तीन बार आचमन करना चाहिए। पहले आचमन के साथ 'ॐ केशवाय नमः', दूसरे के साथ 'ॐ नारायणाय नमः', तीसरे के साथ 'ॐ माधवाय नमः' बोलें। इसके बाद 'ॐ हृषीकेशाय नमः' बोलते हुए हाथ धो लें। बोधायन सूत्र के अनुसार तीन बार आचमन करने से कायिक, मानसिक और वाचिक तीनों प्रकार के पापों की निवृत्ति होती है।

आचमन के बाद दोनों आँखों को जल से स्पर्श करें (सूर्य-तृप्ति), नाक को स्पर्श करें (वायु-तृप्ति), दोनों कानों को स्पर्श करें। इस प्रकार सम्पूर्ण आचमन-विधि संपन्न होती है। आचमन जप के आरंभ में, जप के अंत में और किसी भी अशुद्धि के बाद पुनः करना चाहिए।

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