विस्तृत उत्तर
पूजा से पहले प्राणायाम करने का शास्त्रीय उद्देश्य है — मन को एकाग्र करना, श्वास-प्रश्वास को नियंत्रित करना और शरीर को पवित्र करना। शास्त्रों में कहा गया है कि जिस प्रकार धातु को अग्नि से शुद्ध किया जाता है, उसी प्रकार प्राणायाम से मन और शरीर की शुद्धि होती है।
प्राणायाम के बिना पूजा में मन्त्र-उच्चारण में शुद्धता नहीं आती। मन विचारों में भटकता रहता है, एकाग्रता नहीं बनती। प्राणायाम करने से श्वास पर नियंत्रण आता है, नाड़ियाँ शुद्ध होती हैं, और पूजा के योग्य मानसिक स्थिति बनती है।
पूजा पूर्व प्राणायाम की सामान्य विधि इस प्रकार है — आसन पर सीधे बैठें। दाएं हाथ की मध्यमा और तर्जनी उंगलियाँ मोड़ें। अंगूठे से दाईं नासिका बंद करके बाईं से श्वास लें (पूरक)। फिर दोनों नासिकाएं बंद करके कुछ देर रोकें (कुम्भक)। फिर अनामिका और कनिष्ठा से बाईं नासिका बंद करके दाईं से धीरे-धीरे छोड़ें (रेचक)। इस प्रकार एक प्राणायाम पूर्ण होता है।
पूजा से पहले तीन से पाँच बार प्राणायाम करना उचित माना जाता है। 'ॐ भूः, ॐ भुवः, ॐ स्वः' बोलते हुए प्राणायाम करने का विधान है। इसके बाद संकल्प और पूजा प्रारंभ करें।





