विस्तृत उत्तर
पूजा एक पवित्र क्रिया है जिसमें मन की एकाग्रता और शारीरिक शुद्धता दोनों का विशेष महत्व है। शास्त्रों में कहा गया है कि पूजा के समय मन और वाणी पर संयम रखना चाहिए तथा बाहरी विघ्नों से बचना उचित है।
पूजा आरंभ करने से पहले ही फोन को साइलेंट या स्विच ऑफ कर देना सबसे उत्तम उपाय है। यह न केवल हमारी एकाग्रता बनाए रखता है, बल्कि पूजाघर की पवित्रता का भी सम्मान है।
यदि पूजा के बीच में अचानक फोन बज जाए, तो इसे उतना गंभीर विघ्न नहीं माना जाता जितना किसी सामग्री का गिरना या कोई बड़ी भूल। परंतु एकाग्रता टूट जाती है, इसलिए पहले मन को स्थिर करें। यदि कॉल अत्यंत आवश्यक हो और उठानी पड़े, तो पूजाघर से बाहर जाकर बात करें, पूजास्थल पर बात करना उचित नहीं। कॉल समाप्त होने के बाद हाथ धोकर पुनः पूजाघर में आएं, मन को शांत करें, और जहाँ पूजा रुकी थी वहीं से पुनः आरंभ करें। भगवान से क्षमा मांगें और पूजा पूर्ण करें।
यह याद रखें कि भगवान भाव और श्रद्धा देखते हैं। यदि विघ्न अनजाने में हुआ है और आपका भाव सच्चा है, तो पूजा अधूरी नहीं होती। 'नित्यकर्म पूजा प्रकाश' ग्रंथ में पूजा में हुई भूल-चूक के लिए क्षमायाचना का प्रावधान है — इसी भाव से हाथ जोड़कर क्षमा माँगें और पूजा संपन्न करें।





