विस्तृत उत्तर
शास्त्रीय परंपरा और वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा घर में प्लास्टिक की मूर्ति रखना उचित नहीं माना जाता।
अशुभ क्यों
- 1कृत्रिम पदार्थ — प्लास्टिक एक कृत्रिम और अपवित्र पदार्थ है। शास्त्रों में पूजा के लिए प्राकृतिक सामग्री (धातु, पत्थर, मिट्टी, लकड़ी) का विधान है।
- 2ऊर्जा का अभाव — प्लास्टिक में कोई आध्यात्मिक ऊर्जा नहीं होती, जबकि धातु (पीतल, चाँदी, तांबा) और पत्थर (संगमरमर, शालिग्राम) में प्राकृतिक ऊर्जा होती है।
- 3प्राण प्रतिष्ठा — प्लास्टिक की मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा का कोई शास्त्रीय विधान नहीं है।
- 4अभिषेक अयोग्य — प्लास्टिक पर जल, दूध, पंचामृत आदि से अभिषेक उचित नहीं।
क्या रखें
- ▸पीतल, तांबा, चाँदी, अष्टधातु — सर्वोत्तम।
- ▸संगमरमर, पत्थर — शुभ।
- ▸मिट्टी (टेराकोटा) — शुभ।
- ▸लकड़ी (चंदन, नीम) — शुभ।
- ▸स्फटिक (क्रिस्टल) — विशेष शुभ।
अपवाद: यदि किसी के पास धातु/पत्थर की मूर्ति लेने की सामर्थ्य नहीं है तो भक्ति भाव सबसे महत्वपूर्ण है — किसी भी सामग्री की मूर्ति के सामने सच्ची भक्ति से पूजा करना व्यर्थ नहीं जाता।





