विस्तृत उत्तर
वास्तु शास्त्र के अनुसार पूजा घर में किसी भी पक्षी का घोंसला बनना शुभ संकेत नहीं माना जाता, विशेषतः कबूतर का।
कबूतर घोंसला — वास्तु दृष्टिकोण
- ▸कबूतर का घर में बार-बार आना या घोंसला बनाना वास्तु शास्त्र में अशुभ माना जाता है। कबूतर को कई वास्तु विशेषज्ञ 'राहु' ग्रह से जोड़ते हैं।
- ▸पूजा स्थल पर पक्षियों की बीट, पंख और गंदगी से पवित्रता नष्ट होती है।
- ▸यह संकेत है कि पूजा स्थल की नियमित देखभाल में कमी है।
क्या करें
- 1अहिंसा भाव से — यदि घोंसले में अंडे या बच्चे हैं तो उन्हें बलपूर्वक न हटाएँ। बच्चों के उड़ जाने तक प्रतीक्षा करें।
- 2धीरे-धीरे विस्थापित करें — बच्चे उड़ जाने के बाद घोंसला हटाएँ और उस स्थान को साफ करें।
- 3गंगाजल से शुद्धि — घोंसला हटाने के बाद पूरे पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
- 4प्रवेश रोकें — जाली, पर्दा या अन्य उपाय से कबूतरों के प्रवेश को रोकें।
- 5पूजा जारी रखें — घोंसला होने पर भी पूजा बंद न करें, अलग स्थान पर अस्थायी पूजा स्थल बनाएँ।
ध्यान दें: कबूतर या किसी भी पक्षी को मारना या कष्ट देना सर्वथा वर्जित है। अहिंसा पूर्वक उपाय करें।





