विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार पूजा के समय मन और शरीर दोनों को पूर्णतः भगवान को समर्पित करना चाहिए। इसलिए पूजा प्रारंभ करने से पहले ही परिवार को सूचित कर दें कि आप अगले कुछ समय के लिए पूजा में हैं और बिना अत्यंत आवश्यकता के न बुलाएं।
यदि पूजा के मध्य कोई बुला ले तो सबसे पहले यह देखें कि मामला कितना जरूरी है। यदि कोई आपातकालीन स्थिति है — जैसे कोई बीमार हो, कोई संकट हो — तो भगवान के सामने हाथ जोड़कर कहें कि 'प्रभु, मुझे थोड़ी देर के लिए जाना है, मैं वापस आकर पूजा पूर्ण करूंगा' और पूजा वहीं रोक दें। आवश्यक कार्य निपटाने के बाद हाथ-पैर धोकर पुनः पूजाघर में आकर पूजा को जहाँ से छोड़ा था, वहीं से जारी करें।
यदि बुलाने का कारण साधारण है तो मना कर दें या संकेत से बताएं कि अभी उपलब्ध नहीं हैं।
पूजा को बीच में बिना किसी कारण के अधूरा छोड़ना उचित नहीं माना जाता। परंतु यदि छोड़नी पड़े तो भगवान से विनम्रतापूर्वक क्षमा माँगें और पुनः संपूर्ण भाव से पूजा पूर्ण करें। भगवान की दृष्टि में भाव और श्रद्धा ही सर्वोपरि है।





