विस्तृत उत्तर
पूजा के दौरान यदि भगवान की मूर्ति गिर जाए तो इसके दो अलग-अलग प्रकार होते हैं और दोनों के लिए अलग विधि है।
यदि मूर्ति गिरी लेकिन टूटी नहीं — तो शास्त्रों के अनुसार इसमें प्रायश्चित की उतनी आवश्यकता नहीं है। भगवान से क्षमा माँगें, मूर्ति को उठाकर पंचामृत से स्नान कराएं (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर), स्वच्छ वस्त्र या आसन पर पुनः स्थापित करें और पूजा जारी रखें।
यदि मूर्ति गिरकर टूट जाए (खंडित हो जाए) — तो यह अधिक गंभीर माना जाता है। खंडित मूर्ति की पूजा नहीं करनी चाहिए। भगवान से क्षमायाचना करें। खंडित मूर्ति को किसी पवित्र नदी में या जलाशय में विधिपूर्वक विसर्जित करें। यदि मूर्ति में प्राण-प्रतिष्ठा हुई हो तो किसी जानकार पुरोहित से शांति-कर्म करवाएं। इसके बाद नई मूर्ति लाकर विधिवत स्थापित करें।
वास्तु और ज्योतिष शास्त्र में यह माना जाता है कि मूर्ति का टूटना कभी-कभी इस बात का संकेत होता है कि भगवान ने किसी आने वाले संकट को अपने ऊपर ले लिया। अतः घबराएं नहीं, बल्कि भगवान के प्रति कृतज्ञता रखें और उचित विधि से कार्य करें।





