विस्तृत उत्तर
कलश हिंदू पूजा का अत्यंत पवित्र प्रतीक है। कलश में वरुण देव सहित समस्त तीर्थों, नदियों और देवताओं का आह्वान किया जाता है। इसीलिए कलश का गिरना शास्त्रीय और लोक दोनों दृष्टियों से एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है।
ज्योतिष और शकुन शास्त्र के अनुसार पूजा के दौरान जल से भरे कलश का गिर जाना अशुभ संकेत माना जाता है। इसे भावनात्मक असंतुलन, परिवार में कलह, आर्थिक योजनाओं में परिवर्तन या पितृ देव के अप्रसन्न होने का संकेत माना जाता है।
कलश गिरने पर क्या करें — यदि कलश टूटा नहीं है तो उसे उठाएं, स्वच्छ करें, पुनः जल भरें और पुनः विधिवत स्थापित करें। भगवान से क्षमा माँगें। यदि कलश टूट गया हो तो नया कलश लाएं और विधिपूर्वक स्थापित करें।
इसके बाद गायत्री मंत्र का जाप करें — 'ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यम् भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्' — यह मंत्र अशुभ प्रभाव को शांत करने में सहायक माना जाता है। साथ ही पितृ तर्पण या पितृ के लिए प्रसाद निकालकर भी शांति की प्रार्थना करें।





