विस्तृत उत्तर
लक्ष्मी पूजा (विशेषकर दीपावली) में कलश स्थापना अनिवार्य अंग है। कलश में समस्त देवताओं और तीर्थों का आह्वान होता है।
कलश में रखें
1जल सम्बन्धी
- ▸शुद्ध जल (ताँबे/पीतल के कलश में)
- ▸गंगाजल (कुछ बूँदें)
2कलश में डालें
- ▸सुपारी (1 या 5)
- ▸सिक्का (चाँदी/ताँबे का)
- ▸पंचरत्न (यदि उपलब्ध — सोना, चाँदी, मोती, मूंगा, पन्ना)
- ▸तुलसी पत्र
- ▸दूर्वा (कुश) घास
- ▸चावल (अक्षत) — कुछ दाने जल में
- ▸इलायची (कुछ परम्पराओं में)
- ▸लौंग (कुछ परम्पराओं में)
3कलश के ऊपर
- ▸5 आम के पत्ते (कलश मुख पर)
- ▸नारियल (जटायुक्त, पानी वाला) — रोली-मौली-चन्दन लगा
- ▸कलश गले में मौली (लाल धागा) बाँधें
- ▸कलश पर रोली/कुमकुम से स्वस्तिक बनाएँ
4कलश के नीचे
- ▸चौकी पर लाल/पीला कपड़ा
- ▸अक्षत (चावल) का ढेर
कलश पूजन मंत्र
कलशस्य मुखे विष्णुः कण्ठे रुद्रः समाश्रितः। मूले तत्र स्थितो ब्रह्मा मध्ये मातृगणाः स्मृताः॥





