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मंत्र साधना📜 मंत्र शास्त्र, साधना ग्रंथ, गुरु परम्परा2 मिनट पठन

मंत्र जप के दौरान अगर छींक आ जाए तो क्या करें?

संक्षिप्त उत्तर

छींक: रुकें → छींकें → 'ॐ' बोलें → जप जारी। 10 अतिरिक्त जप (प्रायश्चित)। आचमन (सम्भव हो तो)। कोई दोष/पाप नहीं — शारीरिक क्रिया। फोन = साइलेंट, कोई बोले = मौन, शौच = जाएँ-आएँ। निरंतरता + भावना = सर्वोपरि।

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विस्तृत उत्तर

मंत्र जप के दौरान छींक या खाँसी आना स्वाभाविक शारीरिक क्रिया है — इसमें कोई दोष नहीं।

क्या करें

  1. 1रुकें, छींकें, पुनः आरम्भ: छींक आए तो माला रोकें, छींकें, फिर 'ॐ' बोलकर जप पुनः आरम्भ करें। गिनती वहीं से जारी रखें।
  1. 1प्रायश्चित जप: कुछ परम्पराओं में छींक/खाँसी के बाद 10 अतिरिक्त जप करने का विधान है — 'व्यवधान प्रायश्चित।'
  1. 1आचमन: यदि सम्भव हो तो छींकने के बाद आचमन (तीन बार जल) करें और पुनः जप आरम्भ।
  1. 1चिंता न करें: छींक/खाँसी = शारीरिक प्रतिक्रिया। इसमें पाप/दोष कुछ नहीं। भगवान शरीर की सीमा समझते हैं।

अन्य व्यवधान और उनका समाधान

  • फोन बजे: अनदेखा करें (सम्भव हो तो साइलेंट रखें)।
  • कोई बोल दे: उत्तर न दें, मौन रहें, जप जारी।
  • शौच लगे: माला रखें, शौच जाएँ, हाथ-मुख धोएँ, पुनः आसन।
  • नींद आए: उठकर ठंडा पानी छिड़कें, पुनः जप।

मूल सिद्धांत: जप में निरंतरता और भावना = सर्वोपरि। छोटे-छोटे व्यवधान सामान्य हैं — इनसे जप का फल नष्ट नहीं होता। घबराना या चिंतित होना = अनावश्यक।

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शास्त्रीय स्रोत
मंत्र शास्त्र, साधना ग्रंथ, गुरु परम्परा
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