विस्तृत उत्तर
मंत्र जप के दौरान छींक या खाँसी आना स्वाभाविक शारीरिक क्रिया है — इसमें कोई दोष नहीं।
क्या करें
- 1रुकें, छींकें, पुनः आरम्भ: छींक आए तो माला रोकें, छींकें, फिर 'ॐ' बोलकर जप पुनः आरम्भ करें। गिनती वहीं से जारी रखें।
- 1प्रायश्चित जप: कुछ परम्पराओं में छींक/खाँसी के बाद 10 अतिरिक्त जप करने का विधान है — 'व्यवधान प्रायश्चित।'
- 1आचमन: यदि सम्भव हो तो छींकने के बाद आचमन (तीन बार जल) करें और पुनः जप आरम्भ।
- 1चिंता न करें: छींक/खाँसी = शारीरिक प्रतिक्रिया। इसमें पाप/दोष कुछ नहीं। भगवान शरीर की सीमा समझते हैं।
अन्य व्यवधान और उनका समाधान
- ▸फोन बजे: अनदेखा करें (सम्भव हो तो साइलेंट रखें)।
- ▸कोई बोल दे: उत्तर न दें, मौन रहें, जप जारी।
- ▸शौच लगे: माला रखें, शौच जाएँ, हाथ-मुख धोएँ, पुनः आसन।
- ▸नींद आए: उठकर ठंडा पानी छिड़कें, पुनः जप।
मूल सिद्धांत: जप में निरंतरता और भावना = सर्वोपरि। छोटे-छोटे व्यवधान सामान्य हैं — इनसे जप का फल नष्ट नहीं होता। घबराना या चिंतित होना = अनावश्यक।





