विस्तृत उत्तर
प्रदोष काल (शाम) या निशीथ काल (मध्यरात्रि) में पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठें। बटुक भैरव का चित्र स्थापित करें। पवित्रीकरण और आचमन के बाद संकल्प लें: "मम सकल पाप क्षयार्थं... श्री कालभैरव प्रीत्यर्थं मासिक कालाष्टमी व्रत एवं पूजनं करिष्ये।" फिर आवाहन कर भगवान को जल (पाद्य, अर्घ्य) अर्पित करें। स्नान कराकर मौली (वस्त्र), जनेऊ, लाल चंदन या भस्म (भस्म अति प्रिय है) लगाएं। लाल फूल (गुड़हल) चढ़ाकर नैवेद्य का भोग लगाएं और आरती करें।





