विस्तृत उत्तर
पूजा में सबसे पहले संकल्प लिया जाता है और पंचास्य विनायक का स्मरण किया जाता है। इसके बाद शिवलिंग का पवित्र गंगाजल, गाय के दूध (गोदुग्ध), घी, शहद और श्मशान या यज्ञ की भस्म से अभिषेक किया जाता है। तदनंतर शिव को बिल्वपत्र, धतूरा, श्वेत अर्क के पुष्प, भांग और रुद्राक्ष अर्पित किए जाते हैं। कई सिद्ध साधक यहाँ पवित्र मिट्टी से 'पार्थिव शिवलिंग' बनाकर शिव के आठ विशिष्ट नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए भी शास्त्रसम्मत पूजा करते हैं।





