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शिव पूजा📜 शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता), लिंग पुराण, स्कंद पुराण2 मिनट पठन

जलाभिषेक क्या होता है?

संक्षिप्त उत्तर

जलाभिषेक = शिवलिंग पर पवित्र जल से स्नान कराना। शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता): शिवलिंग पर जल-अर्पण = सर्वाधिक प्रिय पूजा। तीन स्तर: सामान्य जलाभिषेक, पंचामृत अभिषेक, रुद्राभिषेक। शिवलिंग = ब्रह्म का प्रतीक; जल = चेतना का प्रवाह।

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विस्तृत उत्तर

जलाभिषेक का अर्थ है — जल (पवित्र जल) से अभिषेक (स्नान कराना)। शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद आदि अर्पित करने की पवित्र क्रिया को अभिषेक कहते हैं। केवल जल से किए गए अभिषेक को विशेष रूप से 'जलाभिषेक' कहा जाता है।

शास्त्रीय परिभाषा

शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता, अध्याय 22): 'जलेन अभिषेकः जलाभिषेकः।' शिवलिंग पर जल अर्पण करना भगवान शिव की सर्वाधिक प्रिय पूजा है।

लिंग पुराण: अभिषेक = शिव के विभिन्न रूपों की आराधना का सर्वोच्च माध्यम। शिवलिंग स्वयं ब्रह्म का प्रतीक है और जल = चेतना का प्रवाह।

जलाभिषेक के तीन स्तर

  1. 1सामान्य जलाभिषेक — स्वच्छ जल से
  2. 2पंचामृत अभिषेक — दूध, दही, घी, शहद, शर्करा से
  3. 3रुद्राभिषेक — वैदिक मंत्रों (रुद्री/शतरुद्रिय) के साथ विधिवत अभिषेक

महत्त्व: शिव पुराण में कहा गया है कि जो व्यक्ति प्रतिदिन शिवलिंग पर जल चढ़ाता है, उसके समस्त पाप नष्ट होते हैं और भगवान शिव उस पर विशेष कृपा करते हैं।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण (विद्येश्वर संहिता), लिंग पुराण, स्कंद पुराण
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