विस्तृत उत्तर
शिवलिंग पर चाँदी का नाग/नागिन लपेटने का विधान शिव-नाग के गहन सम्बंध पर आधारित है।
शास्त्रीय आधार
- 1शिव = नागेश्वर: भगवान शिव के गले, भुजाओं, जटाओं और कमर पर सर्प विराजमान हैं। वासुकि नाग शिव के कण्ठ में हैं। नाग = शिव के आभूषण।
- 1कालसर्प दोष निवारण: ज्योतिष शास्त्र में कालसर्प दोष शांति हेतु शिवलिंग पर चाँदी/ताँबे का नाग लपेटकर पूजा करने का विधान है।
- 1नाग पंचमी: नाग पंचमी पर शिवलिंग पर चाँदी/ताँबे का नाग चढ़ाना विशेष शुभ।
नाग लपेटने की विधि
- ▸चाँदी या ताँबे का नाग/नागिन बनवाएँ।
- ▸शिवलिंग पर जल अभिषेक के बाद नाग को शिवलिंग पर कुण्डली मारकर (लपेटकर) स्थापित करें।
- ▸'ॐ नमः शिवाय' और 'ॐ नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय...' मंत्र।
- ▸सावन, शिवरात्रि, नाग पंचमी पर विशेष।
लाभ: कालसर्प दोष शांति, सर्प भय निवारण, शिव-नाग कृपा, शत्रु नाश।
विशेष: यह विधान सभी शिवलिंगों पर सामान्य रूप से नहीं किया जाता। मुख्यतः व्यक्तिगत पूजा या कालसर्प दोष विशेष में। मंदिर के शिवलिंग पर बिना पुजारी अनुमति के कुछ न चढ़ाएँ।





