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शिव पूजा📜 शिव पुराण, लिंग पुराण, ज्योतिष ग्रंथ, शैव परम्परा2 मिनट पठन

शिवलिंग के चारों तरफ चांदी की नागिन लपेटने का क्या विधान है?

संक्षिप्त उत्तर

चाँदी नाग: शिव = नागेश्वर (वासुकि कण्ठ आभूषण)। कालसर्प दोष शांति हेतु विशेष विधान। विधि: जल अभिषेक → चाँदी/ताँबे नाग कुण्डली मारकर स्थापन → 'ॐ नमः शिवाय' + नागेन्द्रहाराय मंत्र। सावन/शिवरात्रि/नाग पंचमी शुभ।

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विस्तृत उत्तर

शिवलिंग पर चाँदी का नाग/नागिन लपेटने का विधान शिव-नाग के गहन सम्बंध पर आधारित है।

शास्त्रीय आधार

  1. 1शिव = नागेश्वर: भगवान शिव के गले, भुजाओं, जटाओं और कमर पर सर्प विराजमान हैं। वासुकि नाग शिव के कण्ठ में हैं। नाग = शिव के आभूषण।
  1. 1कालसर्प दोष निवारण: ज्योतिष शास्त्र में कालसर्प दोष शांति हेतु शिवलिंग पर चाँदी/ताँबे का नाग लपेटकर पूजा करने का विधान है।
  1. 1नाग पंचमी: नाग पंचमी पर शिवलिंग पर चाँदी/ताँबे का नाग चढ़ाना विशेष शुभ।

नाग लपेटने की विधि

  • चाँदी या ताँबे का नाग/नागिन बनवाएँ।
  • शिवलिंग पर जल अभिषेक के बाद नाग को शिवलिंग पर कुण्डली मारकर (लपेटकर) स्थापित करें।
  • 'ॐ नमः शिवाय' और 'ॐ नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय...' मंत्र।
  • सावन, शिवरात्रि, नाग पंचमी पर विशेष।

लाभ: कालसर्प दोष शांति, सर्प भय निवारण, शिव-नाग कृपा, शत्रु नाश।

विशेष: यह विधान सभी शिवलिंगों पर सामान्य रूप से नहीं किया जाता। मुख्यतः व्यक्तिगत पूजा या कालसर्प दोष विशेष में। मंदिर के शिवलिंग पर बिना पुजारी अनुमति के कुछ न चढ़ाएँ।

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शास्त्रीय स्रोत
शिव पुराण, लिंग पुराण, ज्योतिष ग्रंथ, शैव परम्परा
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