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शिव पूजा⏱ 2 मिनट पठन

महादेव के भक्त को शिवरात्रि पर कितने प्रहर जागना चाहिए?

शिवरात्रि जागरण: चारों प्रहर सर्वश्रेष्ठ (मोक्ष प्राप्ति)। प्रहर: 1=दूध अभिषेक, 2=दही, 3=घी, 4=शहद — प्रत्येक ~3 घण्टे। न्यूनतम 1 प्रहर अवश्य।

संक्षिप्त उत्तर

शिवरात्रि जागरण: चारों प्रहर सर्वश्रेष्ठ (मोक्ष प्राप्ति)। प्रहर: 1=दूध अभिषेक, 2=दही, 3=घी, 4=शहद — प्रत्येक ~3 घण्टे। न्यूनतम 1 प्रहर अवश्य। 4>3>2>1 प्रहर — जितना अधिक उतना पुण्य। क्षमतानुसार — श्रद्धा प्रधान।

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विस्तृत उत्तर

महाशिवरात्रि पर रात्रि जागरण शिव पूजा का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। शिव पुराण में चारों प्रहर जागरण का विधान है।

चार प्रहर का विधान

रात्रि को चार प्रहरों में विभाजित किया जाता है (प्रत्येक प्रहर लगभग 3 घण्टे):

प्रथम प्रहर (संध्या ~ रात 9): शिवलिंग पर दूध से अभिषेक। 'ॐ नमः शिवाय' जप। शिव ध्यान।

द्वितीय प्रहर (रात 9 ~ 12): दही से अभिषेक। रुद्राष्टाध्यायी या शिव महिम्न स्तोत्र पाठ।

तृतीय प्रहर (रात 12 ~ प्रातः 3): घी से अभिषेक। शिव तांडव स्तोत्र, लिंगाष्टकम् पाठ।

चतुर्थ प्रहर (प्रातः 3 ~ सूर्योदय): शहद/मधु से अभिषेक। शिव चालीसा, शिव आरती। प्रातःकालीन पूजा।

कितने प्रहर जागना चाहिए

  1. 1चारों प्रहर (सर्वश्रेष्ठ): पूर्ण रात्रि जागरण — सर्वोच्च पुण्य। शिव पुराण में कहा गया है कि चारों प्रहर जागकर पूजा करने से मोक्ष प्राप्त होता है।
  1. 1तीन प्रहर: यदि चारों प्रहर सम्भव न हो तो तीन प्रहर।
  1. 1दो प्रहर: दो प्रहर भी शुभ।
  1. 1कम से कम एक प्रहर: न्यूनतम एक प्रहर अवश्य जागें। एक प्रहर भी नहीं जागना = शिवरात्रि व्रत अपूर्ण।

शिव पुराण का वचन: 'चत्वारि शृंगा त्रयो अस्य पादा...' — चार प्रहर = चार शृंग (शिखर)। जो चारों प्रहर जागकर पूजा करता है, वह शिवलोक प्राप्त करता है।

व्यावहारिक सुझाव: वृद्ध, रोगी, बच्चे — अपनी क्षमता अनुसार जागें। शिव भक्ति में जबरदस्ती नहीं, श्रद्धा है। जितना सम्भव हो जागें और जप-ध्यान करें।

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कितने प्रहर जागना चाहिए

1. चारों प्रहर (सर्वश्रेष्ठ): पूर्ण रात्रि जागरण — सर्वोच्च पुण्य। शिव पुराण में कहा गया है कि चारों प्रहर जागकर पूजा करने से मोक्ष प्राप्त होता है। 2. तीन प्रहर: यदि चारों प्रहर सम्भव न हो तो तीन प्रहर। 3. दो प्रहर: दो प्रहर भी शुभ। 4. कम से कम एक प्रहर: न्यूनतम एक प्रहर अवश्य जागें।

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