विस्तृत उत्तर
कुक्कुटेश्वर लिंग की साधना के लिए पात्रता का मुख्य आधार शिव में पूर्ण श्रद्धा और मोक्ष की तीव्र इच्छा है। इसके कठोर नियमों में ब्रह्मचर्य का पालन, सत्यवादिता और ब्रह्म मुहूर्त में निरंतर जागरण अनिवार्य है। निषेध के रूप में तामसिक आहार—विशेषकर मांस और मदिरा—का सर्वथा और कठोर निषेध है। कुक्कुट भक्षण या किसी भी प्रकार की पशु-हिंसा करने वाले को इस तीर्थ में तांत्रिक साधना का कोई अधिकार नहीं है। शिव पुराण और शैव आगम सात्त्विक वृत्ति और सर्व-भूत दया (अहिंसा) पर अत्यधिक बल देते हैं, जो इस लिंग की ऊर्जा के अनुकूल होने के लिए आवश्यक है।



