विस्तृत उत्तर
नहीं। शास्त्र इसका कठोरता से खंडन करते हैं:
अवैज्ञानिक और हिंसक: जीव-विज्ञान के अनुसार, सर्प 'रेप्टाइल' (स्तनपायी नहीं) होते हैं; दूध उनका आहार नहीं है और यह उनके पाचन तंत्र को खराब कर उनकी मृत्यु का कारण बन सकता है। यह 'अहिंसा' के सिद्धांत का उल्लंघन है।
अशास्त्रीय: शास्त्रों में नागों को दूध 'पिलाने' का नहीं, अपितु 'अर्पण' या 'अभिषेक' करने का विधान है।
सही विधि: पूजा 'चेतन जीवित नाग' की नहीं, बल्कि 'भगवान शंकर के आभूषण' के रूप में 'प्रतिमा' (चांदी, तांबे, या मिट्टी) की होनी चाहिए।