विस्तृत उत्तर
भूलोक के सात महासागरों में भिन्न-भिन्न प्रकार के दिव्य द्रव भरे होने का वर्णन शास्त्रों में मिलता है। जम्बू द्वीप के चारों ओर लवण सागर है जो खारे जल से भरा है। प्लक्ष द्वीप के चारों ओर इक्षु सागर है जो गन्ने के रस से भरा है। शाल्मलि द्वीप को सुरा सागर (मदिरा/शराब) घेरे है। कुश द्वीप के चारों ओर सर्पि सागर है जो घृत (घी) से भरा है। क्रौंच द्वीप को दधि सागर (दही) घेरे है। शाक द्वीप के चारों ओर दुग्ध सागर है जो दूध से भरा है और सबसे बाहरी पुष्कर द्वीप को जल सागर (शुद्ध मीठा जल) घेरे है। इन सात महासागरों ने सम्पूर्ण भू-मण्डल को वलयाकार रूप में एक के बाद एक आच्छादित कर रखा है। इन भिन्न-भिन्न द्रवों का प्रतीकात्मक अर्थ यह हो सकता है कि ब्रह्माण्ड की विभिन्न परतें विभिन्न प्रकार की ऊर्जाओं और चेतना के स्तरों से युक्त हैं।
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