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विस्तृत उत्तर
अहिंसा का अर्थ सभी प्राणियों में आत्मवत् दृष्टि रखना और उनके हित के लिये प्रवृत्त रहना बताया गया है। यह केवल किसी को चोट न पहुँचाने तक सीमित नहीं, बल्कि प्राणियों के प्रति अपने समान भाव रखने और उनके कल्याण की दिशा में चलने का सिद्धांत है। पाठ में कहा गया है कि इसी अहिंसा से आत्मज्ञान की सिद्धि प्राप्त होती है। इसलिए अहिंसा योगमार्ग में आत्मज्ञान से भी जुड़ी हुई है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 42, श्लोक 12
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