विस्तृत उत्तर
नाभि में सदाशिव का ध्यान विशेष कल्पना के साथ बताया गया है। नाभि से तीन अंगुल नीचे अष्टकोण, पंचकोण या त्रिकोणात्मक उत्तम कमल का ध्यान करें। उसमें अग्निमण्डल, चन्द्रमण्डल, सूर्यमण्डल अथवा इनके क्रम का विधिपूर्वक ध्यान किया जाता है। अग्नि के नीचे धर्म, ज्ञान, वैराग्य और ऐश्वर्य की कल्पना की जाती है। मण्डलों के ऊपर सत्त्व, रज और तम की भावना करके पार्वती से सुशोभित सत्त्वस्थित रुद्र का चिन्तन करना चाहिए। नाभिकमल में सदाशिव का ध्यान भी कहा गया है।
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