ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
प्राणायाम📜 श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 47, श्लोक 55-57⏱ 1 मिनट पठन

प्राणायाम से मन, वचन और कर्म के दोष कैसे मिटते हैं?

अंतिम अपडेट: 29 मई 2026
संक्षिप्त उत्तर

सतत अभ्यास से प्राणायाम मन, वचन और कर्म से उत्पन्न दोषों को नष्ट करता है और देह की रक्षा करता है।

📖

विस्तृत उत्तर

प्राणायाम से मन, वचन और कर्म के दोष सतत अभ्यास द्वारा मिटते हैं। पाठ में कहा गया है कि जो पुरुष योगपूर्वक अभ्यास करता है, उसके चित्त में व्यसन उत्पन्न नहीं होता। लगातार अभ्यास करने पर प्राणायाम उस योगी के मन, वचन और कर्म से उत्पन्न सभी दोषों को नष्ट कर देता है। उसी प्राणायाम से बुद्धिमान योगी की देह की भलीभाँति रक्षा भी होती है और श्वास-प्रश्वास की गति घटती जाती है।

📜
शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 47, श्लोक 55-57
उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

प्राणायाम से मन, वचन और कर्म के दोष कैसे मिटते हैं को संदर्भ सहित समझें

प्राणायाम से मन, वचन और कर्म के दोष कैसे मिटते हैं का सबसे सीधा सार यह है: सतत अभ्यास से प्राणायाम मन, वचन और कर्म से उत्पन्न दोषों को नष्ट करता है और देह की रक्षा करता है।

प्राणायाम जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है. उपलब्ध स्रोत श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 47, श्लोक 55-57 इस दिशा को मजबूत आधार देता है।

इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।

•

उत्तर का शास्त्रीय आधार देखने के लिए श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 47, श्लोक 55-57 के उल्लेख को ध्यान से पढ़ें।

•

प्राणायाम श्रेणी के दूसरे प्रश्न इस उत्तर की सीमा और उपयोग दोनों स्पष्ट करते हैं।

•

यदि विस्तृत विधि या पृष्ठभूमि चाहिए, तो नीचे दिए गए लेख पहले खोलें।

प्राणायाम प्रश्नोत्तर
🔗

आगे क्या पढ़ें

प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी लिंक

इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
WhatsApp
क्या यह उत्तर सहायक था?

🏷 सम्बंधित विषय

प्राणायामदोष नाशमनवचनकर्मदेह रक्षाश्रीलिङ्गमहापुराणपूर्वभाग अध्याय 8
📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

प्राणायाम से मन, वचन और कर्म के दोष कैसे मिटते हैं — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको प्राणायाम से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 8, PDF पृष्ठ 47, श्लोक 55-57 पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।

🙏 पूजा विधि📿 मंत्र जाप🔱 शिव पूजा🏠 वास्तु💭 सपनों का मतलब🪐 ज्योतिष

इसी विषय पर और प्रश्नोत्तर

टैग द्वारा खोजें:#प्राणायाम#दोष नाश#मन#वचन#कर्म#देह रक्षा#श्रीलिङ्गमहापुराण#पूर्वभाग अध्याय 8