विस्तृत उत्तर
यह प्रश्न श्रद्धालु और जिज्ञासु दोनों के मन में उठता है। हिंदू दर्शन इसका एक सुंदर और तर्कसंगत उत्तर देता है।
भगवान सबका ख्याल रखते हैं — यह सत्य है। परंतु 'ख्याल रखना' का अर्थ हर कठिनाई हटा देना नहीं है। एक समझदार माता-पिता बच्चे को सभी दुखों से बचाकर घर में बंद नहीं करते — वे उसे दुनिया में जाने देते हैं, गिरने देते हैं, क्योंकि इसी से वह बड़ा होता है। ईश्वर भी इसी भाव से हमारे साथ हैं।
शास्त्रों के अनुसार दुख के मुख्य कारण हमारे स्वयं के पूर्व कर्म हैं। भगवान ने जीव को कर्म करने की स्वतंत्रता दी है — वे इस स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं। यदि वे हर बुरे कर्म का परिणाम तुरंत रोक दें, तो जीव कभी नहीं सीखेगा। जगतगुरु श्रीकृष्ण ने स्वयं दुर्योधन को नहीं रोका — उसे उसकी स्वेच्छा दी।
इसके अलावा, बुरे लगने वाले अनुभव कभी-कभी हमारी सबसे बड़ी वृद्धि का कारण बनते हैं। जो कठिनाई अभी बुरी लग रही है, वह आगे चलकर हमारी सबसे बड़ी शक्ति बन सकती है। भगवान का ख्याल कभी-कभी हमें दर्द से नहीं, दर्द के माध्यम से मिलता है।
शास्त्र यह भी कहते हैं कि भक्त के जीवन में आने वाली कठिनाई भगवान उससे बड़ी विपदा को हल्का करने के लिए देते हैं — एक छोटा दुख देकर एक बड़े दुख से बचाते हैं। यह भी उनका ख्याल ही है।





