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तंत्र षट्कर्म📜 तंत्र शास्त्र, अथर्ववेद (अभिचार सूक्त)1 मिनट पठन

तंत्र साधना में अभिचार कर्म क्या होता है?

संक्षिप्त उत्तर

दूसरों को हानि (मंत्र/यंत्र)। मारण/उच्चाटन/विद्वेषण = अभिचार। तामसिक — गंभीर पाप। करने वाले = 3-10 गुना बुरा (कर्म)। पूर्णतः वर्जित। केवल शांति कर्म। अनैतिक+अवैध।

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विस्तृत उत्तर

अभिचार = दूसरों को हानि पहुंचाने वाले तांत्रिक कर्म:

क्या है: 'अभि' + 'चार' = 'किसी पर चलाना' — मंत्र/यंत्र/तंत्र द्वारा दूसरों को हानि (रोग/दुर्भाग्य/मृत्यु)। अथर्ववेद में भी अभिचार सूक्त हैं (प्राचीनतम संदर्भ)।

प्रकार: मारण, उच्चाटन, विद्वेषण = अभिचार कर्म।

गुण: तामसिक — सर्वनिकृष्ट। गंभीर पाप + कर्म बंधन।

दुष्प्रभाव (करने वाले पर)

  • 'जो दूसरों का बुरा करे = उसका 3/7/10 गुना बुरा' — कर्म सिद्धांत।
  • मानसिक विकार, परिवार कष्ट, अकाल मृत्यु = तांत्रिक मान्यता।

सामान्य भक्त: पूर्णतः वर्जित। शांति कर्म = एकमात्र उचित।

needs_review: अभिचार = अनैतिक+अवैध — विधि विवरण = अनुचित।

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शास्त्रीय स्रोत
तंत्र शास्त्र, अथर्ववेद (अभिचार सूक्त)
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