विस्तृत उत्तर
अभिचार = दूसरों को हानि पहुंचाने वाले तांत्रिक कर्म:
क्या है: 'अभि' + 'चार' = 'किसी पर चलाना' — मंत्र/यंत्र/तंत्र द्वारा दूसरों को हानि (रोग/दुर्भाग्य/मृत्यु)। अथर्ववेद में भी अभिचार सूक्त हैं (प्राचीनतम संदर्भ)।
प्रकार: मारण, उच्चाटन, विद्वेषण = अभिचार कर्म।
गुण: तामसिक — सर्वनिकृष्ट। गंभीर पाप + कर्म बंधन।
दुष्प्रभाव (करने वाले पर)
- ▸'जो दूसरों का बुरा करे = उसका 3/7/10 गुना बुरा' — कर्म सिद्धांत।
- ▸मानसिक विकार, परिवार कष्ट, अकाल मृत्यु = तांत्रिक मान्यता।
सामान्य भक्त: पूर्णतः वर्जित। शांति कर्म = एकमात्र उचित।
needs_review: अभिचार = अनैतिक+अवैध — विधि विवरण = अनुचित।





