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विस्तृत उत्तर
इस कथा का संदेश है कि कर्म का नियम इतना श्रेष्ठ है कि देवताओं को भी उसका सम्मान करना पड़ता है। लक्ष्मी जी जगत की स्वामिनी होते हुए भी अपने कृत्य का फल भोगती हैं। भगवान विष्णु स्वयं इस नियम को नहीं तोड़ते।
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