विस्तृत उत्तर
भागवत कथा से कर्म और पाप नष्ट होने की बात दो रूपों में आती है। धुंधुकारी कहता है कि सप्ताह श्रवण का योग लगते ही पाप काँप उठते हैं, क्योंकि यह कथा उनका अंत कर देगी। जैसे आग गीली-सूखी, छोटी-बड़ी लकड़ियों को जला देती है, वैसे ही सप्ताह श्रवण मन, वचन और कर्म से किए गए नए-पुराने, छोटे-बड़े सभी पापों को भस्म कर देता है। आगे कहा गया है कि सप्ताह श्रवण से हृदय की गांठ खुलती है, सभी संशय कट जाते हैं और कर्म क्षीण हो जाते हैं। इसलिए कथा केवल सुनने की वस्तु नहीं, बल्कि हृदय-परिवर्तन, पाप-दहन और कर्म-क्षय का साधन बताई गई है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





