विस्तृत उत्तर
भीष्म पितामह ने कृष्ण को भगवान इसलिए माना क्योंकि वे उन्हें साक्षात भगवान, सबके आदिकारण और परम पुरुष नारायण जानते थे। युधिष्ठिर कृष्ण को अपना ममेरा भाई, प्रिय मित्र, मंत्री, हितैषी और सारथी मानते थे, पर भीष्म ने कहा कि वही कृष्ण परमात्मा हैं। वे अपनी माया से लोगों को मोहित करते हुए यदुवंश में छिपकर लीला कर रहे हैं। उनका गूढ़ भाव भगवान शंकर, देवर्षि नारद और भगवान कपिल जैसे महापुरुष जानते हैं। भीष्म ने कृष्ण को सर्वात्मा, समदर्शी, अद्वितीय, अहंकाररहित और निष्पाप कहा। वे सबमें समान हैं, फिर भी अपने अनन्य भक्तों पर विशेष कृपा करते हैं; इसलिए भीष्म के प्राणत्याग के समय स्वयं दर्शन देने आए।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





