विस्तृत उत्तर
भीष्म के अनुसार कृष्ण वास्तव में एक हैं, पर अनेक जीवों के हृदय में अनेक रूप से जान पड़ते हैं। इसे वे सूर्य के उदाहरण से समझाते हैं। जैसे एक ही सूर्य अनेक आँखों से अलग-अलग रूप में दिखाई देता है, वैसे ही अजन्मा कृष्ण अपने द्वारा रचे गए अनेक शरीरधारियों के हृदय में अलग-अलग रूप से प्रतीत होते हैं। पर वास्तविकता यह है कि कृष्ण एक ही हैं और सबके हृदय में विराजमान हैं। भीष्म कहते हैं कि वे भेद के भ्रम से रहित होकर उसी कृष्ण को प्राप्त हो गए हैं। इस कथन में कृष्ण की सर्वव्यापकता और जीवों की दृष्टि का अंतर दोनों आते हैं: देखने वाले अनेक हैं, पर सबमें स्थित परमात्मा एक ही कृष्ण हैं।
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