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श्रीमद्भागवत📜 श्रीमद्भागवत 1.9, श्लोक 42⏱ 1 मिनट पठन

भीष्म के अनुसार कृष्ण एक होकर भी अनेक कैसे दिखते हैं?

अंतिम अपडेट: 30 मई 2026

भीष्म के अनुसार कृष्ण वास्तव में एक हैं, पर अनेक जीवों के हृदय में अनेक रूप से जान पड़ते हैं।

संक्षिप्त उत्तर

भीष्म ने सूर्य का उदाहरण दिया: जैसे एक सूर्य अनेक आँखों से अनेक दिखता है, वैसे एक कृष्ण अनेक हृदयों में अनेक रूप से जान पड़ते हैं।

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विस्तृत उत्तर

भीष्म के अनुसार कृष्ण वास्तव में एक हैं, पर अनेक जीवों के हृदय में अनेक रूप से जान पड़ते हैं। इसे वे सूर्य के उदाहरण से समझाते हैं। जैसे एक ही सूर्य अनेक आँखों से अलग-अलग रूप में दिखाई देता है, वैसे ही अजन्मा कृष्ण अपने द्वारा रचे गए अनेक शरीरधारियों के हृदय में अलग-अलग रूप से प्रतीत होते हैं। पर वास्तविकता यह है कि कृष्ण एक ही हैं और सबके हृदय में विराजमान हैं। भीष्म कहते हैं कि वे भेद के भ्रम से रहित होकर उसी कृष्ण को प्राप्त हो गए हैं। इस कथन में कृष्ण की सर्वव्यापकता और जीवों की दृष्टि का अंतर दोनों आते हैं: देखने वाले अनेक हैं, पर सबमें स्थित परमात्मा एक ही कृष्ण हैं।

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शास्त्रीय स्रोत
श्रीमद्भागवत 1.9, श्लोक 42
उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

भीष्म के अनुसार कृष्ण एक होकर भी अनेक कैसे दिखते हैं को संदर्भ सहित समझें

भीष्म के अनुसार कृष्ण एक होकर भी अनेक कैसे दिखते हैं का सबसे सीधा सार यह है: भीष्म ने सूर्य का उदाहरण दिया: जैसे एक सूर्य अनेक आँखों से अनेक दिखता है, वैसे एक कृष्ण अनेक हृदयों में अनेक रूप से जान पड़ते हैं।

श्रीमद्भागवत जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है. उपलब्ध स्रोत श्रीमद्भागवत 1.9, श्लोक 42 इस दिशा को मजबूत आधार देता है।

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उत्तर का शास्त्रीय आधार देखने के लिए श्रीमद्भागवत 1.9, श्लोक 42 के उल्लेख को ध्यान से पढ़ें।

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