विस्तृत उत्तर
परीक्षित का परिचय गर्भ में सुरक्षित किए गए बालक के रूप में मिलता है। उत्तरा भय से कृष्ण के पास दौड़ी और बोली कि दहकता हुआ लोहे का बाण उसकी ओर आ रहा है; वह उसे जला दे तो भी चले, पर उसके गर्भ को नष्ट न करे। कृष्ण तुरंत समझ गए कि अश्वत्थामा ने पांडवों के वंश को निर्बीज करने के लिए ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया है। तब कृष्ण ने उत्तरा के गर्भ को अपनी माया के कवच से ढक दिया। इसी रक्षा से पांडव वंश की परंपरा बची। इसलिए परीक्षित वही गर्भस्थ बालक हैं जिनकी रक्षा कृष्ण ने की।
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