विस्तृत उत्तर
भीष्म पितामह ने उत्तरायण में प्राण त्यागे क्योंकि यह वह समय बताया गया है जिसे भगवत्परायण और मृत्यु को अपने अधीन रखने वाले योगी चाहते हैं। जब वे धर्म का उपदेश कर रहे थे, तभी उत्तरायण का समय आ पहुँचा। भीष्म ने उसी समय वाणी का संयम किया और मन को सब ओर से हटाकर सामने खड़े आदिपुरुष श्रीकृष्ण में लगा दिया। कृष्ण पीतांबरधारी चतुर्भुज रूप में उनके सामने थे और भीष्म की आँखें उन्हीं पर स्थिर हो गईं। कृष्ण-दर्शन से उनकी शस्त्र-पीड़ा दूर हुई और विशुद्ध कृष्ण-धारणा से शेष अशुभ मिट गया। इसलिए उनका उत्तरायण प्राणत्याग समय, योग, भक्ति और कृष्ण-स्मरण से जुड़ा हुआ है।
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