विस्तृत उत्तर
महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने मृत स्वजनों के लिए शोक और धर्म-कर्म दोनों किए। वे श्रीकृष्ण के साथ गंगा तट पर गए। स्त्रियों को आगे करके उन्होंने उन मरे हुए संबंधियों के लिए तर्पण किया जो जलांजलि के अधिकारी थे। वहाँ पांडवों और उनके परिवार ने मृत बंधुओं को जलदान दिया और उनके गुणों को याद करके बहुत विलाप किया। इसके बाद उन्होंने उस गंगाजल में फिर स्नान किया जिसे भगवान के चरण-कमलों की धूलि से पवित्र कहा गया है। धृतराष्ट्र, गांधारी, कुंती, द्रौपदी और युधिष्ठिर भी शोक में थे। कृष्ण ने धौम्य आदि मुनियों के साथ सबको समझाया कि संसार के सभी प्राणी काल के अधीन हैं।
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