विस्तृत उत्तर
कुंती स्तुति का हिंदी भाव यह है कि कृष्ण बाहर और भीतर सबमें स्थित परमेश्वर हैं, लेकिन माया के आवरण के कारण सामान्य इंद्रियां उन्हें नहीं पहचान पातीं। कुंती मानती है कि कृष्ण शुद्ध हृदय वाले परमहंसों के भीतर प्रेममयी भक्ति जगाने के लिए अवतरित हुए हैं। वह कृष्ण को वासुदेव, देवकीनंदन, नंदगोपकुमार और गोविंद कहकर प्रणाम करती है। वह स्वीकार करती है कि कृष्ण ने देवकी और पांडवों की अनेक विपत्तियों से रक्षा की। कुंती चाहती है कि विपत्तियाँ आती रहें, क्योंकि उनमें कृष्ण का दर्शन मिलता है और कृष्ण-दर्शन जन्म-मृत्यु से छुड़ाता है। अंत में वह अपने यदुवंशियों और पांडवों के प्रति मोह को काटकर मन को गंगा की धारा की तरह कृष्ण में लगाने की प्रार्थना करती है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





