विस्तृत उत्तर
भीष्म पितामह की शरशय्या कथा महाभारत युद्ध के बाद की है। युधिष्ठिर प्रजाद्रोह के भय और धर्म जानने की इच्छा से कुरुक्षेत्र गए, जहाँ भीष्म बाणों की शय्या पर पड़े थे। उनके साथ पांडव, श्रीकृष्ण, व्यास, धौम्य और अन्य ब्राह्मण भी थे। पांडवों ने भीष्म को प्रणाम किया और अनेक ऋषि उन्हें देखने पहुँचे। भीष्म ने पांडवों को प्रेम से देखा, कृष्ण को साक्षात भगवान और नारायण माना, और युधिष्ठिर को धर्म के अनेक रहस्य समझाए। उत्तरायण का समय आने पर उन्होंने वाणी रोककर मन कृष्ण में लगाया। कृष्ण के दर्शन से उनकी पीड़ा दूर हुई। फिर उन्होंने कृष्ण की स्तुति की और उनके प्राण कृष्ण में लीन हो गए।
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