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श्रीमद्भागवत प्रश्नोत्तर — 429 प्रश्न

श्रीमद्भागवत से जुड़े 429 प्रामाणिक प्रश्नोत्तर पढ़ें। शास्त्रों और पुराणों पर आधारित उत्तर एक ही जगह मिलेंगे।

कुल 429 प्रश्न

कृष्ण गृहस्थ होकर भी निर्लिप्त कैसे रहे?

कृष्ण गृहस्थ होकर भी निर्लिप्त रहे क्योंकि वे परमेश्वर हैं; वे अपनी माया से मनुष्यलोक में लीला करते हैं, पर प्रकृति के गुण उन्हें बांध नहीं पाते।

कृष्ण गृहस्थ जीवनकृष्ण निर्लिप्तकृष्ण लीला
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भागवत पुराण में कृष्ण का रूप कैसा है?

भागवत पुराण में कृष्ण का रूप ऐसा बताया गया है कि उनका वक्ष सौंदर्य की लक्ष्मी का निवास, मुख नेत्रों के लिए सौंदर्य-सुधा और चरण भक्तों का आश्रय हैं।

कृष्ण रूपभागवत पुराणकृष्ण दर्शन
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कृष्ण भक्तों से कैसे मिलते हैं?

कृष्ण भक्तों और नगरवासियों से उनकी योग्यता के अनुसार मिले: किसी को प्रणाम किया, किसी से बोले, किसी को गले लगाया, किसी से हाथ मिलाया और किसी को प्रेमभरी दृष्टि दी।

कृष्ण भक्तकृष्ण मिलनभक्ति
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कृष्ण को पूर्णकाम क्यों कहा जाता है?

कृष्ण को पूर्णकाम कहा जाता है क्योंकि वे अपने आप में सदा पूर्ण हैं और किसी बाहरी वस्तु से उनकी कोई कमी पूरी नहीं होती।

पूर्णकाम कृष्णकृष्ण अर्थआत्माराम
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कृष्ण को आत्माराम क्यों कहा जाता है?

कृष्ण को आत्माराम कहा जाता है क्योंकि वे अपने आत्मस्वरूप में ही पूर्ण आनंद और संतोष रखने वाले हैं; उन्हें बाहरी वस्तुओं से पूर्णता नहीं मिलती।

आत्माराम कृष्णकृष्ण अर्थभक्ति
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द्वारका में कृष्ण का स्वागत कैसे हुआ?

द्वारका में कृष्ण का स्वागत भेंट, स्तुति, वेदपाठ, शंख-तुरही, ब्राह्मणों, हाथी, रथों, नर्तकों, गायकों और प्रेम से उमड़े परिजनों के साथ हुआ।

कृष्ण स्वागतद्वारकावासीवसुदेव
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कृष्ण के स्वागत में द्वारका कैसे सजाई गई?

कृष्ण के स्वागत में द्वारका के फाटक, राजमार्ग, बाजार, चौक और घरों के द्वार बंदनवार, ध्वज, फूल, अक्षत, कलश, धूप और दीप से सजाए गए।

द्वारका सजावटकृष्ण स्वागतद्वारका उत्सव
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कृष्ण की द्वारका इतनी सुंदर क्यों थी?

कृष्ण की द्वारका सुंदर थी क्योंकि वह यादव वीरों से सुरक्षित, ऋतु-वैभव से संपन्न, उद्यानों, सरोवरों, सजावट और मंगल-चिह्नों से भरी थी।

कृष्ण की द्वारकाद्वारका नगरीद्वारकापुरी
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युधिष्ठिर ने भीष्म के बाद राज्य कैसे संभाला?

भीष्म के बाद युधिष्ठिर कृष्ण के साथ हस्तिनापुर लौटे, धृतराष्ट्र और गांधारी को सांत्वना दी और धर्मपूर्वक राज्य करने लगे।

युधिष्ठिरभीष्मराज्य
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भीष्म पितामह के प्राण त्यागने पर क्या हुआ?

भीष्म के प्राण त्यागने पर सब मौन हो गए, देवता और मनुष्य वाद्य बजाने लगे, राजाओं ने प्रशंसा की और आकाश से फूल बरसे।

भीष्म प्राण त्यागकृष्णदेवता
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भीष्म पितामह को मोक्ष कैसे मिला?

भीष्म को मोक्ष कृष्ण-स्मरण से मिला; उन्होंने मन, वाणी और दृष्टि कृष्ण में लीन की और भेद-मोह छोड़कर कृष्ण को प्राप्त हुए।

भीष्म मोक्षकृष्णप्राण त्याग
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भीष्म के अनुसार कृष्ण एक होकर भी अनेक कैसे दिखते हैं?

भीष्म ने सूर्य का उदाहरण दिया: जैसे एक सूर्य अनेक आँखों से अनेक दिखता है, वैसे एक कृष्ण अनेक हृदयों में अनेक रूप से जान पड़ते हैं।

कृष्णपरमात्माभीष्म स्तुति
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राजसूय यज्ञ में कृष्ण की पूजा क्यों हुई?

राजसूय यज्ञ में कृष्ण की पूजा इसलिए हुई क्योंकि भीष्म उन्हें सबके आत्मा प्रभु और सबसे पहले पूजने योग्य मानते हैं।

राजसूय यज्ञकृष्ण पूजायुधिष्ठिर
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कृष्ण का नाम लेते हुए मृत्यु से क्या फल मिलता है?

कृष्ण में मन लगाकर और उनके नाम का कीर्तन करते हुए शरीर छोड़ने वाला योगी कामना और कर्मबंधन से मुक्त होता है।

कृष्ण नाममृत्युभक्ति
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भीष्म पितामह ने युधिष्ठिर को कौन से धर्म बताए?

भीष्म ने युधिष्ठिर को वर्णाश्रम धर्म, प्रवृत्ति-निवृत्ति धर्म, दानधर्म, राजधर्म, मोक्षधर्म, स्त्रीधर्म, भगवद्धर्म और पुरुषार्थ बताए।

भीष्मयुधिष्ठिरधर्म
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भीष्म पितामह ने मृत्यु से पहले क्या उपदेश दिया?

भीष्म ने मृत्यु से पहले युधिष्ठिर को वर्णाश्रम धर्म, दानधर्म, राजधर्म, मोक्षधर्म, स्त्रीधर्म, भगवद्धर्म और पुरुषार्थों के उपाय बताए।

भीष्म उपदेशयुधिष्ठिरधर्म
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भीष्म पितामह ने कृष्ण को भगवान क्यों माना?

भीष्म ने कृष्ण को भगवान इसलिए माना क्योंकि वे साक्षात नारायण, सबके आदिकारण, सर्वात्मा और अनन्य भक्तों पर कृपा करने वाले परमात्मा हैं।

भीष्मकृष्ण भगवाननारायण
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भीष्म स्तुति में कृष्ण के युद्ध रूप का वर्णन क्या है?

भीष्म स्तुति में कृष्ण के युद्ध रूप में धूल-पसीने से सजे केश, कवच, बाणों के घाव, रास-चाबुक और पार्थसारथी छवि आती है।

कृष्ण युद्ध रूपभीष्म स्तुतिमहाभारत युद्ध
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भीष्म ने कृष्ण को पार्थसारथी क्यों याद किया?

भीष्म ने कृष्ण को पार्थसारथी इसलिए याद किया क्योंकि कृष्ण ने अर्जुन के सारथी बनकर रथ चलाया, गीता सुनाई और भक्तवत्सल रूप दिखाया।

पार्थसारथीकृष्णअर्जुन
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कृष्ण ने भीष्म के लिए प्रतिज्ञा क्यों तोड़ी?

कृष्ण ने भीष्म की प्रतिज्ञा को सत्य और ऊँचा करने के लिए अपनी शस्त्र न उठाने की प्रतिज्ञा तोड़ी।

कृष्ण प्रतिज्ञाभीष्ममहाभारत युद्ध
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भीष्म को कृष्ण का कौन सा रूप दिखा?

भीष्म को प्रसन्न मुख, अरुण नेत्र, पीतांबर और चतुर्भुज रूप में कृष्ण दिखे; स्तुति में उन्होंने पार्थसारथी युद्ध रूप भी याद किया।

भीष्मकृष्ण रूपचतुर्भुज
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भीष्म पितामह ने मृत्यु के समय किसका ध्यान किया?

भीष्म पितामह ने मृत्यु के समय श्रीकृष्ण का ध्यान किया और मन, वाणी तथा दृष्टि को उन्हीं में लगा दिया।

भीष्म ध्यानकृष्णप्राण त्याग
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भीष्म स्तुति हिंदी अर्थ क्या है?

भीष्म स्तुति का भाव है कि मृत्यु के समय बुद्धि, मन और प्रेम श्रीकृष्ण में स्थिर हों, क्योंकि वही परमात्मा और अंतिम आश्रय हैं।

भीष्म स्तुति अर्थकृष्णपार्थसारथी
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भीष्म स्तुति क्या है?

भीष्म स्तुति मृत्यु के समय श्रीकृष्ण को समर्पित प्रार्थना है, जिसमें भीष्म ने कृष्ण के सौंदर्य, युद्ध रूप और परमात्मा स्वरूप का ध्यान किया।

भीष्म स्तुतिकृष्णमहाभारत
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भीष्म पितामह और कृष्ण की कथा क्या है?

भीष्म ने कृष्ण को साक्षात भगवान नारायण माना, युद्ध में उनका पार्थसारथी रूप याद किया और मृत्यु के समय उन्हीं में मन लगाया।

भीष्म और कृष्णकृष्णपार्थसारथी
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भीष्म पितामह ने उत्तरायण में प्राण क्यों छोड़े?

उत्तरायण वह समय बताया गया है जिसे भगवत्परायण योगी चाहते हैं; उसी समय भीष्म ने मन कृष्ण में लगाकर प्राण त्यागे।

भीष्म उत्तरायणप्राण त्यागयोगी
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भीष्म पितामह की मृत्यु कैसे हुई?

भीष्म पितामह ने उत्तरायण में वाणी रोककर मन कृष्ण में लगाया, कृष्ण की स्तुति की और उनके प्राण कृष्ण में लीन हो गए।

भीष्म मृत्युउत्तरायणकृष्ण ध्यान
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भीष्म पितामह शरशय्या कथा क्या है?

भीष्म पितामह शरशय्या पर पड़े थे; पांडव, कृष्ण और ऋषि उनके पास गए, उन्होंने धर्म बताया और कृष्ण का ध्यान करते हुए प्राण त्यागे।

भीष्म शरशय्याकुरुक्षेत्रयुधिष्ठिर
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युधिष्ठिर ने हिंसा के प्रायश्चित पर क्या कहा?

युधिष्ठिर ने कहा कि जिन स्त्रियों के पति और भाई-बंधु मारे गए, उनके प्रति हुए अपराध को गृहस्थ यज्ञों से शुद्ध करना संभव नहीं।

युधिष्ठिरहिंसाप्रायश्चित
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युधिष्ठिर को महाभारत युद्ध का पाप क्यों लगा?

युधिष्ठिर को लगा कि उन्होंने नश्वर शरीर के लिए अनेक स्वजनों, गुरुओं और सेनाओं का वध कराया; इसलिए शास्त्र-वचन भी उन्हें संतोष नहीं दे पाया।

युधिष्ठिरयुद्ध पापधर्मयुद्ध
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युधिष्ठिर युद्ध के बाद दुखी क्यों थे?

युधिष्ठिर अपने भाई-बंधुओं और स्वजनों के मारे जाने से दुखी थे; उन्हें लगता था कि उन्होंने नश्वर शरीर के लिए अनेक अक्षौहिणी सेनाएँ मरवा दीं।

युधिष्ठिरमहाभारत युद्धशोक
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कुंती ने कृष्ण से मोह छुड़ाने की प्रार्थना क्यों की?

कुंती ने यदुवंशियों और पांडवों के प्रति मजबूत ममता को काटने और अपनी बुद्धि को गंगा की धारा की तरह कृष्ण में लगाने की प्रार्थना की।

कुंतीमोहकृष्ण भक्ति
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कृष्ण दर्शन से जन्म-मृत्यु कैसे मिटती है?

कुंती के अनुसार विपत्ति में कृष्ण का दर्शन होता है, और कृष्ण के चरणकमल का दर्शन जन्म-मृत्यु के प्रवाह को रोक देता है।

कृष्ण दर्शनजन्म मृत्युकुंती
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कृष्ण लीला सुनने का फल क्या है?

कृष्ण लीला को सुनने, गाने, कीर्तन करने और याद करने वाले भक्त शीघ्र ही कृष्ण के चरणकमल का दर्शन पाते हैं, जो जन्म-मृत्यु का प्रवाह रोक देता है।

कृष्ण लीलाश्रवणकीर्तन
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कृष्ण अवतार का उद्देश्य क्या है?

कुंती स्तुति में कृष्ण अवतार के कई कारण बताए गए हैं: भक्तों की कीर्ति, देवकी-वसुदेव का वर, दैत्यों का नाश, पृथ्वी का भार हटाना और सुनने-स्मरण योग्य लीला।

कृष्ण अवतारकुंती स्तुतिदैत्य विनाश
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कृष्ण ने पांडवों को किन विपत्तियों से बचाया?

कुंती ने कहा कि कृष्ण ने पांडवों को विष, लाक्षागृह की आग, राक्षसों, द्यूतसभा, वनवास, युद्धों और अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से बचाया।

कृष्णपांडवकुंती
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विपदः सन्तु नः शश्वत् का अर्थ क्या है?

इस वाक्य का भाव है कि हमारे जीवन में विपत्तियाँ आती रहें, क्योंकि विपत्तियों में कृष्ण का दर्शन होता है और उनका दर्शन जन्म-मृत्यु से मुक्त करता है।

विपदः सन्तु नः शश्वत्कुंती स्तुतिकृष्ण दर्शन
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कुंती ने कृष्ण से विपत्ति क्यों मांगी?

कुंती ने विपत्ति इसलिए मांगी क्योंकि विपत्तियों में कृष्ण का दर्शन होता है, और कृष्ण-दर्शन के बाद जन्म-मृत्यु के चक्र में नहीं आना पड़ता।

कुंतीविपत्तिकृष्ण दर्शन
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कुंती स्तुति हिंदी अर्थ क्या है?

कुंती स्तुति का भाव है कि कृष्ण परमेश्वर हैं, भक्तों के रक्षक हैं, विपत्ति में उनका दर्शन होता है और मन केवल उन्हीं में लगना चाहिए।

कुंती स्तुति अर्थकृष्णविपदः सन्तु
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कुंती स्तुति क्या है?

कुंती स्तुति में कुंती ने कृष्ण को प्रकृति से परे परम पुरुष, भक्तों के रक्षक और जन्म-मृत्यु से छुड़ाने वाले भगवान के रूप में नमस्कार किया।

कुंती स्तुतिकृष्णभक्ति
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युधिष्ठिर ने कृष्ण को क्यों रोका?

युधिष्ठिर ने कृष्ण को प्रेम से रोका, क्योंकि वे अपने भाई-बंधुओं की मृत्यु के भारी शोक से मुक्त नहीं हो पा रहे थे।

युधिष्ठिरकृष्णमहाभारत युद्ध
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कृष्ण द्वारका क्यों लौटना चाहते थे?

राज्य-संबंधी कार्य पूरे होने के बाद कृष्ण ने द्वारका जाने का विचार किया; उनके भीतर का अलग कारण विस्तार से नहीं बताया गया।

कृष्णद्वारकापांडव
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श्रीमद्भागवत — शास्त्रीय प्रश्नोत्तर संग्रह

पौराणिक पर श्रीमद्भागवत श्रेणी में आपको सनातन धर्म, वेद, पुराण और शास्त्रों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर विद्वानों द्वारा शास्त्रीय प्रमाणों सहित तैयार किया गया है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत उत्तर पढ़ें। अन्य विषयों के लिए प्रश्नोत्तरी मुख्य पृष्ठ देखें।

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