विस्तृत उत्तर
भीष्म को मृत्यु के समय सामने खड़े श्रीकृष्ण का दिव्य रूप दिखा। वे प्रार्थना करते हैं कि देवदेव भगवान अपने प्रसन्न हास, अरुण कमल जैसे नेत्र, कमल-से मुख और चतुर्भुज रूप में उनके सामने रहें, जब तक वे शरीर न छोड़ दें। कृष्ण पीतांबर पहने चतुर्भुज रूप में उनके सामने खड़े थे और भीष्म की दृष्टि उसी रूप पर स्थिर थी। स्तुति में भीष्म कृष्ण के अन्य प्रिय रूप भी याद करते हैं: तमाल के समान साँवला शरीर, सूर्य-किरण जैसा पीतांबर, घुँघराली अलकों से घिरा मुख, युद्धभूमि में धूल और पसीने से सजा पार्थसारथी रूप, बाणों से घायल शरीर और हाथ में रथ का पहिया लेकर उनकी ओर दौड़ते हुए भक्तवत्सल भगवान।
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