विस्तृत उत्तर
भीष्म पितामह ने मृत्यु से पहले युधिष्ठिर को धर्म का विस्तृत उपदेश दिया। युधिष्ठिर ने शरशय्या पर पड़े भीष्म से अनेक ऋषियों के सामने धर्म के रहस्य पूछे। भीष्म ने वर्ण और आश्रम के अनुसार पुरुषों के स्वाभाविक धर्म बताए। उन्होंने वैराग्य और राग से जुड़े निवृत्ति और प्रवृत्ति रूप दो प्रकार के धर्मों का वर्णन किया। इसके बाद उन्होंने दानधर्म, राजधर्म, मोक्षधर्म, स्त्रीधर्म और भगवद्धर्म को अलग-अलग संक्षेप और विस्तार से समझाया। उन्होंने धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष इन चार पुरुषार्थों तथा उन्हें पाने के उपाय भी अनेक उपाख्यानों और इतिहासों के सहारे बताए। इस उपदेश के बाद उत्तरायण आया और भीष्म ने कृष्ण का ध्यान किया।
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