विस्तृत उत्तर
कृष्ण ने पंचजन्य शंख द्वारका पहुंचकर वहाँ के लोगों का विरह-दुख शांत करने के लिए बजाया। वे आनर्त देश में आए थे और द्वारका की प्रजा उनके दर्शन के लिए तरस रही थी। शंख बजते ही लोगों को कृष्ण के आगमन का पता चला। पंचजन्य की ध्वनि साधारण आवाज नहीं बताई गई; उसे संसार के भय को भी भयभीत करने वाली ध्वनि कहा गया है। इसका प्रभाव यह हुआ कि पूरी प्रजा अपने स्वामी कृष्ण के दर्शन की लालसा से नगर के बाहर निकल आई। इसलिए पंचजन्य बजाना केवल आगमन की सूचना नहीं था, बल्कि कृष्ण और द्वारकावासियों के प्रेम-संबंध का संकेत था।
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