विस्तृत उत्तर
परीक्षित गर्भ में इसलिए बचे क्योंकि संकट के समय उत्तरा ने कृष्ण को ही अपना रक्षक माना। उसने कहा कि कृष्ण के अतिरिक्त उसे अभय देने वाला कोई नहीं है, और जो दहकता हुआ बाण आ रहा है वह उसे भले जला दे, पर गर्भ को नष्ट न करे। कृष्ण ने समझ लिया कि यह अश्वत्थामा का ब्रह्मास्त्र है, जिसका उद्देश्य पांडव वंश को निर्बीज करना था। पांडवों ने भी जलते हुए बाणों को अपनी ओर आते देखा। कृष्ण ने अपने अनन्य शरणागत भक्तों की रक्षा के लिए सुदर्शन चक्र धारण किया और उत्तरा के गर्भ को अपनी माया के कवच से ढक दिया। ब्रह्मास्त्र अमोघ और रोकना कठिन बताया गया है, फिर भी कृष्ण के वैष्णव तेज के सामने वह शांत हो गया।
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