विस्तृत उत्तर
भीष्म स्तुति वह प्रार्थना है जो भीष्म पितामह ने शरीर छोड़ने से पहले श्रीकृष्ण के सामने की। उन्होंने अपनी शुद्ध और कामनारहित बुद्धि यदुवंश-शिरोमणि अनंत भगवान कृष्ण के चरणों में समर्पित की। वे कृष्ण के साँवले शरीर, पीतांबर, घुँघराली अलकों से घिरे कमल-सदृश मुख और अर्जुन-सखा रूप पर प्रेम व्यक्त करते हैं। स्तुति में वे युद्धभूमि का कृष्ण रूप भी याद करते हैं: घोड़ों की धूल, पसीने की बूँदें, कवच, बाणों के घाव, अर्जुन का सारथी रूप, गीता उपदेश और रथ का पहिया लेकर दौड़ना। अंत में भीष्म कृष्ण को एक होकर भी सबके हृदय में स्थित परमात्मा मानते हैं और उन्हीं में अपने को लीन कर देते हैं।
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