विस्तृत उत्तर
द्वारका में कृष्ण का स्वागत प्रेम, भेंट और उत्सव के साथ हुआ। द्वारका के लोगों ने अनेक प्रकार की भेंटें लाकर उनका स्वागत किया, जैसे लोग आदर से सूर्य को दीपदान करते हैं। सबके मुख प्रेम से खिल उठे और वे कृष्ण को अपना सुहृद, संरक्षक, माता, पिता, गुरु और परम आराध्य कहकर स्तुति करने लगे। वसुदेव, अक्रूर, उग्रसेन, बलराम, प्रद्युम्न, चारुदेष्ण और साम्ब आदि ने कृष्ण के आने की बात सुनते ही सोना, बैठना और भोजन जैसे काम छोड़ दिए। वे मंगल के लिए हाथी को आगे करके, वैदिक मंत्र पढ़ते ब्राह्मणों और मांगलिक सामग्री के साथ रथों पर कृष्ण की अगवानी के लिए निकले। शंख, तुरही और वेदध्वनि होने लगी। नट, नर्तक, गायक, सूत, मागध और वंदिजन कृष्ण के चरित्र गाते हुए चले।
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